नॉर्मल डिलीवरी के लिए कौन सी प्लेसेंटा पोजीशन बेस्ट है?HealthPlanet

Posted on Wed 12th Oct 2022 : 21:16

प्लसेंटा प्रिविया क्या है?
निषेचित अंडा गर्भाशय में जहां भी प्रत्यारोपित होता है, वहीं अपरा विकसित होती है। प्लेसेंटा प्रिविया तब होता है जब कई बार यह निषेचित अंडा स्वयं को गर्भाशय के निचले हिस्से के अंदर जोड़ लेता है। और गर्भावस्था के मध्य अवधि के बाद भी वहीं बना रहता है।

यदि प्रसव के समय तक अपरा ग्रीवा के पास हो, तो योनि के जरिये शिशु का बाहर निकलने का रास्ता अवरुद्ध हो सकता है। प्लेसेंटा प्रिविया से गर्भावस्था के मध्य में या अंतिम चरण में रक्तस्त्राव भी हो सकता है।

हो सकता है अपरा ने आंशिक तौर पर ग्रीवा को ढका हो (माइनर प्लेसेंटा प्रिविया) या फिर पूरी तरह ही ग्रीवा को ढक लिया हो (मेजर प्लेसेंटा प्रिविया)। इन दोनों ही स्थितियों में आपके शिशु का जन्म सीजेरियन ऑपरेशन के जरिये करने की जरुरत होगी।


बाईं तरफ के चित्र में अपरा की सामान्य स्थिति दर्शाई गई है।
बीच वाले चित्र में आंशिक या माइनर प्लेसेंटा प्रिविया दर्शाया गया है।
दाईं तरफ के चित्र में मेजर प्लेसेंटा प्रिविया दर्शाया गया है।

गर्भावस्था के अंत तक 300 में से एक महिला को कुछ हद तक प्लेसेंटा प्रिविया रहता है। इनमें से अधिकांश आंशिक प्लेसेंटा प्रिविया होते हैं।

अपरा के नीचे स्थित होने का पता कैसे चलता है?
अल्ट्रासाउंड स्कैन के जरिये डॉक्टर को आपकी प्लेसेंटा की स्थिति का पता चलता है। यदि आप गर्भावस्था की शुरुआत में अल्ट्रासाउंड स्कैन कराएं और इसमें प्लेसेंटा ग्रीवा के पास दिखाइ दे, तो भी चिंता न करें। शिशु के बढ़ने के साथ आपका बढ़ता गर्भाशय शायद अपरा को ऊपर की तरफ खींच लेगा और यह ग्रीवा से दूर हो जाएगी। इसे अंग्रेजी में प्लेसेंटल माइग्रेशन कहा जाता है। ऐसा उन अधिकांश मामलों में हो जाता है जहां अपरा गर्भावस्था की शुरुआत में नीचे की तरफ स्थित होती है।

आपके एनॉमली स्कैन (टिफा या अल्ट्रासाउंड लेवल II स्कैन) में पता चल सकता है। यह स्कैन 18 से 20 सप्ताह की गर्भावस्था के बीच किया जाता है। यदि एनॉमली स्कैन में पता चलता है कि आपकी अपरा नीचे की ओर स्थित है, तो आपको कुछ हफ्तों बाद अपरा की स्थिति पता करने के लिए दोबारा स्कैन करवाना होगा।

चूंकि, प्लेसेंटा गर्भाशय में प्रत्यारोपित होती है, इसलिए यह वास्तव में हिलती-डुलती नहीं है। मगर गर्भाशय के बढ़ने पर यह ग्रीवा से दूर हो सकती है। यह स्कैन संभवतया 28 सप्ताह की गर्भावस्था के आसपास होगा। हालांकि, कई बार डॉक्टर करीब 24 सप्ताह की गर्भावस्था में भी फॉलो-अप स्कैन करवाने के लिए कह सकती हैं।

यदि फॉलो-अप स्कैन में भी प्लेसेंटा नीचे की तरफ दिखाई दे या फिर अपरा की स्पष्ट तस्वीर पाना संभव न हो रहा हो, तो डॉक्टर आपको योनि के जरिये स्कैन (ट्रांसवेजाइनल स्कैन) करवाने के लिए कह सकती हैं। इससे डॉक्टर को अपरा की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी, जिससे वे पहले स्कैन की सत्यता की जांच कर सकेंगे।

डॉक्टर सावधानीपूर्वक एक विशेष आकार के उपकरण को आपकी योनि में धीरे से डालेंगी, ताकि आपका गर्भाशय दिखाई दे सके। इस स्क्रैन से आपको कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। यह एकदम सुरक्षित प्रक्रिया होती है।

बहुत से मामलों में अंतिम चरण में होने वाले स्कैन से यही पता चलता है कि अपरा ऊपर की ओर खिसक कर रास्ते से हट गई है। अगर, यह अभी तक नहीं हुआ है, तो भी ऐसा होने के लिए काफी समय बाकी है।

हालांकि, यदि अपरा गर्भाशय की पीछे की दीवार से लगी हो या फिर आपका पहले सीजेरियन ऑपरेशन हो चुका है, तो प्लेसेंटा के खिसकने की उम्मीद कम ही होती है।

कभी-कभार, प्लेसेंटा प्रिविया का पता अन्य तरीकों से भी चलता है:

यदि आपका शिशु ब्रीच अवस्था (सिर ऊपर और नितंब नीचे की ओर होना) में है, ट्रांसवर्स स्थिति (शिशु का सिर माँ के शरीर के एक साइड में और नितंब दूसरी साइड में होना) में है या काफी ऊपर की तरफ है। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि वह सिर नीचे वाली अवस्था में नहीं आ पा रहा, क्योंकि अपरा बीच में आ रही है।

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